रुचि वीरा ने दिन रात मेहनत करके बनाया अपना सियासी महल

बिजनौर से अपना सियासी घर छोड़ कर आंवला लोकसभा की तरफ अपने कदम बढ़ाए जबकि रुचि वीरा को मालूम था की आंवला लोकसभा में मेरा कोई भी वजूद नहीं है लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पार्टी द्वारा दी गई जिम्मेदारी को स्वीकार किया और निकल पड़ी एक नई सियासी भूमि पर अपना महल खड़ा करने ।

दिन रात भागा दौड़ी और मेहनत आखिरकार रंग लेकर आई आज अगर हम बात करें रुचि वीरा की आंवला लोकसभा में यह नाम किसी तारीफ का मोहताज नहीं आज हर एक की जबान पर रुचि वीरा का नाम सुनने को मिलता है हालांकि जब बिजनौर छोड़ कर रुचि वीरा को आंवला का लोकसभा का टिकट मिला तो आंवला लोकसभा की जनता ना खुश थी कि पता नहीं उनका प्रत्याशी कैसा होगा लेकिन रुचि वीरा का शालीनता भरा स्वभाव भाषा शैली और लोगों के प्रति प्रेम ने आंवला लोक सभा की जनता के दिलों में अपनी वह जगह बना ली जो शायद अभी तक इतनी जल्दी कोई नहीं बना पाया।

रुचि वीरा का कहना है की जनता से मैं वोट के लालच में नहीं बल्कि आंवला लोकसभा के लोगों के दिल में अपनी जगह बनाने आई हूं वोट के लिए तो लोग झूठे वादे करते रहते हैं और उनका वोट हासिल करके भाग जाते हैं लेकिन मैं झूठे वादे नहीं करूंगी बल्कि उनके सुख-दुख में उनके साथ रहने का काम करूंगी मैं एक महिला हूं और महिलाओं के हक के लिए आवाज बनूंगी।

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