देश-दुनिया : मी टू मुहिम ! अंजामे गुलिस्ताँ क्या होगा ??

0
25

मी टू मुहिम ! अंजामे गुलिस्ताँ क्या होगा ?

स्पेशल रिपोर्ट हर्षवर्धन

अमेरिका की सामाजिक कार्यकर्ता टराना बुर्के ने महिला यौन उत्पीड़न के खिलाफ सर्वप्रथम 2006 में आवाज उठाई थी इस कैम्पेन को ही Me Too का नाम दिया गया था,आज यह कैम्पेन भारत सहित कई देशों में फ़ैल गया है,महिलायें सोशल मीडिया के जरिये यौन शोषण भद्दी टिप्पणी और छेड़छाड़ के वाकयों को अभिव्यक्त करती हैं,निःसन्देह यह कैम्पेन स्वागत के योग्य है, पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के संग हुई ज्यादती पर महिलाओं को ही दोषी ठहराया जाता है..उनके ही चरित्र पर लांछन लगाये जाते हैं,क्यूंकि देश परिवेश चाहे कोई भी हो,महिलाओं की परवरिश ही ऐसी हुई है..उन्हें पुरुषों की तरह मुखरता का वो अधिकार सहज ही हासिल नहीं रह है,अब आज के आधुनिक युग में जहां महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं,उनकी सामाजिक भूमिकाएं भी बदल रही हैं ऐसे में समाज की मानसिकता भी बदली जानी जरुरी है..पुरुषों की महिलाओं के प्रति धारणा, रवैयों और आदतों में भी बदलाव आना जरुरी है..साथ ही महिलाओं की जो अवधारणा पुरुष समाज ने निर्मित कर रखी है ,वे धारणाएं भी टूटनी चाहिए #me too की ये आवाज निःसन्देह इसी अवधारणा को बदलने का काम करेगी जिसमें हमेशा, आवाज उठाने वाली महिला ही अघोषित अपराधी होती है ,किंतु इसके दुरुपयोग की भी पर्याप्त सम्भावनाएं हैं, किसी महिला के अपने किसी निजी स्वार्थ के चलते किसी पुरूष की सामाजिक छवि को भी धक्का पहुंच सकता है,पुरुषों के अंदर महिलाओं के प्रति एक स्वाभाविक डर पैदा होगा जो ..महिला को सुरक्षा तो जरूर देगा ,किन्तु ऐसा न हो कि इसके भय के चलते कोई व्यक्ति अपने संस्थान में महिला कर्मियों की तैनाती से डरे,यदि ऐसा हुआ तो महिलाओं के रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं,और ये भी हो सकता है कि कई महिलाओं के लिए ये आवाज ,ब्लैकमेलिंग के जरिए धन कमाने का हथियार बन जाए…
हर बात के पॉजिटिव व निगेटिव पहलू तो होते ही हैं, बावजूद इसके ,यह कैम्पेन महिलाओं को ताकत और हौसला देगा,तो साथ ही समाज को स्त्री/पुरुष समानता आधारित सभ्य व जिम्मेदार समाज बनाने की दिशा में भी कारगर होगा…..

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here